Biology

परजीवी जंतु किसे कहते हैं(parajeevee jantu kise kahate hain)

परजीवी जंतु किसे कहते हैं(parajeevee jantu kise kahate hain):


ऐसे जंतु जिनके dna में परिचालन द्वारा एक अतिरिक्त जीन व्यवस्थित होता है जो अपना लक्षण व्यक्ति करता है उसे परजीवी जंतु कहा जाता है

परजीवी जंतु  जैसे ;- चूहे , खरगोश, सुअर, भेड़ , गाय ,व मछली आदि जीव परजीवी जीव के अंतर्गत आते है लेकिन इन सभी में से 95% परजीवी जंतु के  रूप में चूहे ही है

अभी इसका परिभाषा नीचे दूसरे शब्दों में अच्छे से समझाया गया है इसको पढ़ने के बाद आपको नीचे इन जियो के मनुष्य क्या-क्या लाभ उठाते हैं उनके बारे में हम आपको बताएंगे तो आप नीचे पढ़ सकते हैं

दूसरे शब्दों में अगर हम इसकी परिभाषा कहते हैं तो यह जंतु कुछ इस प्रकार से होते हैं जो कि इनके अंदर कुछ अलग जीने को डाला जाता है जो अपने लक्षण व्यक्त करता है इससे यह पता चलता है कि यह जीन

किस प्रकार का है या किस प्रकार का नहीं है यही पता करने  के लिए परजीवी जंतु का निर्माण किया जाता है  कि किसी भी जीन या किसी भी दवाई का टेस्ट करने के

उपयोग में आता है आप उनका परिभाषा इस प्रकार से ही कह सकते हैं कि दवाई या किसी बाहरी जीन का  टेस्ट लेने के लिए जिस जंतु का उपयोग करते हैं उसे परजीवी जंतु  जाता है
 परजीवी जन्तु से मनुष्य को क्या लाभ है

1. सामान्य शरीर का क्रिया वा विकास :


परजीवी जंतु का विकास खासकर इसलिए किया जाता है कि  जिनके अंदर जिनों के नियंत्रण बिकास व सामान्य कार्य पर  पड़ने वाले प्रभावो का अध्ययन किया जाता है

उदाहरण के लिए विकास में भागीदार जटिल कारको जैसे इंसुलिन की तरह विकास कारक का अध्यन किया जाता है जैसे उनके अंदर किसी दूसरे जाति के जीव का जीन प्रवेश कराया जाता है तो उस पर क्या प्रभाव पड़ता है तथा प्रयोग करने पर क्या नियंत्रण रहता है क्या नहीं रहता है तथा क्या लक्षण प्रदर्शित करता है इसके बारे में सूचना मिलती है

2. रोगों का अध्ययन:


 इन पर जीव-जंतु द्वारा हम रोगों के दवाइयों का अध्यन करते हैं हम इसको थोड़ा विस्तार में पड़ लेते हैं जैसे मनुष्य को कोई रोग है उसके लिए अगर कोई दवाई तैयार किया जाता है तो उस दवाई को डायरेक्ट ले मनुष्य के ऊपर प्रयोग नहीं किया जाता है उस दवाई को परजीवी जंतु के ऊपर सबसे पहले उपयोग किया जाता है तथा वहां पर उसका लक्षण दिखाई देता है कि यह दवाई कैसा है जहरीला तो नहीं है या सही है उसके लिए काम करता है या नहीं करता है इस तरह रोगों का अध्ययन जीवो के द्वारा रोगों के दवाइयों का अध्यन किया जाता है

3. जैविक उत्पाद:

 कुछ मानव रोग के उपचार के लिए औषधि की आवश्यकता होती है जो जैविक उत्पाद से बनी होती है ऐसी उत्पाद को बनाना अक्सर बहुत महंगा होता है
लेकिन इस का निर्माण हम परजीवी जंतुओं के द्वारा आसानी से कर सकते हैं उनके dna में हम कुछ बदलाव कर देते हैं बाहरी जीन डाल देते हैं जिसके द्वारा हमें अधिक मात्रा में जैविक उत्पाद देखने को मिलता है या मनुष्य को प्राप्त होता है

 उदाहरण;- मानव प्रोटीन(अल्फा-1 antitripsin) का उपयोग एम्फसीमा  निदान में होता है नोट: सर्वप्रथम 1977 में परजीवी गाय जिसका नाम रोजी था वह मानव प्रोटीन संपन्न दूध देती थी एक किलोग्राम दूध में दो पॉइंट 4 ग्राम प्रोटीन पाया जाता था जोकि मनुष्य स्वस्थ के लिए बहुत ही लाभदायक होता है

4. टीकाकरण सुरक्षा:


टीकाकरण जो मनुष्य को इस समय बहुत ही आवश्यक हो गया है टीका लगवा ने से पहले मतलब जब टीका लांच किया गया था तब उससे पहले इसका उपयोग सर्वप्रथम चूहा तथा बंदर पर प्रयोग  किया गया था जो परजीवी थे जब इनके ऊपर प्रयोग किया

गया और उसका रिजल्ट विश्वसनीय साबित हुआ तो उसे मानव  के शरीर में लगाने के लिए आगे दे दिया गया मतलब की एक विश्वास हो गया कि यह टीका मनुष्य के लिए एक दम सही है

5. रासायनिक सुरक्षा परीक्षण: 

यह आबिषालुता सुरक्षा परीक्षण कहलाता है यह बिधि वह विधि है जो दवाई अथवा औषधि के आबिषालुता का परिणाम हो जाता हैं की यह दवा विष पूर्ण नही है इसलिए दवाओं का प्रयोग सर्वप्रथम परजीवी जन्तुओ के ऊपर किया जाता है फिर मनुष्य के ऊपर

नमस्कार दोस्तों तो आज का टॉपिक सिर्फ इतना ही था बाकि अगले टॉपिक में हम फिर मिलते हैं आप चाहे तो हमारे साइड का ना याद कर सकते हैं मोदी योजना डॉट x y को स्पर्श सकते हैं मिलूं बार में जाकर के आप अपने पसंदीदा को उसको चुनिए और वहां से पढ़ने का कीजिए

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