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परागण किसे कहते हैं इन हिंदी(What is pollination called in hindi)

 परागण किसे कहते हैं इन हिंदी(What is pollination called in hindi);




अगर किसी पुष्प के परागकण निकालकर किसी दूसरे पुष्प के वर्तिका ग्रह तक पहुंचते हैं इसी क्रिया को परागण कहा जाता है
दूसरे शब्दों में:
जब कुछ तो के पराग कोष से pragkan निकलता है तो वह किसी दूसरे अपने ही jaatyy के पुष्प के वर्तिका ग्रह तक पहुंचना यही परागण कहलाता है
परागण किसे कहते हैं
परागण किसे कहते हैं 
ऊपर आप dekh सकते हैं कि मैंने बहुत ही अच्छी तरह से आपको इसका डेफिनेशन बताएं बहुत ही sarlar  शब्दों में और आप इसको अच्छे से पढ़ते रहिए

परागण के प्रकार(Types of pollination);

वैसे तो  pragan कई प्रकार के होते हैं जिसके द्वारा भी pushp  का पराग कोष से परागकण निकल कर जिस माध्यम से दूसरे पौधे पर जाता है वही madhyam परागण का प्रकार बन जाता है
यहां पर मैंने 8:00 या 10:00 प्रकार के प्रकारों का उल्लेख किया है जो आपके परीक्षा के लिए akdam  काम के लिए संपन्न है
1.स्व युग्मन परागण(Self coupling pollination)
2. सजातीय परागण(Homogeneous pollination)



 3.वायु परागण(Air pollination)
4.कीट परागण(Insect pollination)
5. पंछी परागण((Bird pollination)
6. घोघा परागण(Ghogha pollination)
7. चमगादड़ परागण(Bat pollination)



8. जल परागण आदि(Water pollination)

1.स्व युग्मन परागण(Self coupling pollination);

जब किसी पौधे के पुष्प से परागकण nikal कर उसी पुष्प परागकण nikal  कर उसी pushp  के वर्तिका ग्रह तक पहुंचते हैं जिसे स्व युग्मन परागणकहते हैं
मेरे कहने का matlab  यह है कि या क्रिया स्वयं में ही संपन्न हो जाती है एक पुष्प है वह अपना क्रिया स्वयं से संपन्न कर लेता है उसमें परागण अपने आप ही हो जाता है उससे किसी को कोई भी मतलब नहीं रहता है जिसे हम स्वयं परागण कहते हैं स्व का मतलब स्वयं होता ही है तो उससे भी पता चल जाता है कि या अपने आप में ही paragana होगा इस तरह आप बहुत ही अच्छी तरह से याद कर सकते हैं ऊपर दिया गया डेफिनिशन



विशेषताएं(Features);

विशेषताएं में यह बताया जाता है कि यह परागण होने के लिए पुष्प में कौन सी विशेषताएं होनी चाहिए या पुष्पा किस प्रकार का होना चाहिए जिससे यह परागण आसानी से संपन्न हो सके
देखिए आप स्व yugmon  परागण होने के लिए पौधे में या पुष्प में कोई खास विशेषताएं नहीं होनी चाहिए उसमें सिर्फ यही विशेषता होती है कि जो कुछ तो होता है वह उसका वर्तिका इस tarh से होता है कि जब उससे परागकण निकले तो उसी उसके वर्तिका ग्रह पर जा गिरे

2. सजातीय परागण(Homogeneous pollination);

सजातीय परागण में जिस पौधे का पुष्प के  praman निकलता है उसी पौधे के दूसरे को पुष्प पर या दूसरे पुष्प के के वर्तिका तक पहुंचता है तक पहुंचता है जिसे सजाती है परागण कहते हैं

3.वायु परागण (Air pollination);

जब पुष्पों में  pragan वायु केdvara संपन्न होता है तो इसे वायु परागण कहते हैं इस प्रकार के परागण को वायु परागण कहते हैं



विशेषताएं(Features);

वायु परागित पुष्पों एक लिंगी होते हैं
 1. जैसे मक्का इनके परागकोष ओ से प्रचुर मात्रा में परागकण उत्पन्न होते हैं
2. परागकण छोटे shusak हुआ हल्के होते हैं
3. पंख युक्त तथा jal रोधी ही होते हैं
4. इनके pushap का वर्तिका lamba होता है रोम  युक्त चिपचिपा होता है
यह मैंने चार विशेषताएं आपको बताए हैं जो कि वायु परागित पुष्पों के लिए अनिवार्य है या आपके बोर्ड एग्जाम में पूछा भी जा सकता है



जंतु परागण{Animal pollination}

जंतुओं के द्वारा होने वाले jantu  जंतु  परागण कहलाते हैं
 दूसरे शब्दों में(In other words);
जब परागण की क्रिया जंतुओं के द्वारा संपन्न होती है तो उसे जंतु परागण कहते हैं जैसे घोघा द्वारा परागण पक्षियों द्वारा परागण आदि


4.कीट परागण(Insect pollination);



अधिकांश पुष्पों में परागण ki too  द्वारा होता है जिसे हम कीट परागण कहते हैं
जैसे :मधुमक्खी, तितली, भंवरा आदि
कीट परागण होता कैसा होता है अब हम  aapko बताएंगे
उपरोक्त माध्यम के कीट जैसे ही किसी पुष्प पर बैठते हैं उस पुष्प के वर्तिका आगरा पर बैठते हैं तो परागकण उनके रोम पर chipk  जाते हैं और वह उड़कर किसी दूसरे पौधे पर बैठ जाते हैं जब वह किसी दूसरे पौधों पर baudh जाते हैं तो उस पौधे के वर्तिका ग्रह तक परागकण आसानी से पहुंच जाते हैं इसीलिए कुछ तुम्हें कुछ  bishesh विशेषताएं भी होनी चाहिए

विशेषताएं(Features);

1. कीटों को आकर्षित करने के लिए पुष्प चमकीला होना चाहिए
2. कीटों को आकर्षित करने के लिए पुष्प सुगंध होना चाहिए
3. कीड़ों द्वारा परागण की  kriya संपन्न कराने के लिए पुष्प sunder hona chaheye hai

 4. कीटो से परागण ठीकरिया संपन्न कराने के लिए usane मकरंद की  aadhik आवश्यकता होती है
6. कीट परागण करने के लिए  puspak में आकर्षण की व्यवस्था होनी चाहिए जैसे सुगंधित होना rangeen होना चमकीला hona 



अब आप देख सकते हैं मैंने आपको बहुत ही अच्छी तरह से समझाने की कोशिश भी की है और इसका परिभाषा भी बहुत अच्छे से दिखा दिया है तो अब आप और भी परागण पढ़ने के लिए पेज को स्क्रोल डाउन करके पढ़ते रहिए और हां यदि आप और भी आजकल पढ़ना चाहते हैं तो आप नीचे देगा आर्टिकुलो को या अपना सब्जेक्ट से चुन सकते हैं

5. पंछी परागण(Bird pollination);

कुछ पुष्पा में परागण की क्रिया पक्षियों dvara  संपन्न होते हैं इस प्रकार के परागण को panchhi  परागण कहते हैं पंछी परागण पुष्प रंग, गंध ,मकरंद ,अधिक होनी चाहिए
तो पंछी परागण की क्रिया संपन्न करने के लिए उसमें रंग गंध मकरंद अधिक होना चाहिए जैसे पंछी उसको उसको पर आकर्षित होकर बैठ सके और उसी पुष्प का परागकण उनके शरीर पर या चोचे पर लग जाता है तब वह किसी दूसरे पौधे पर जाते हैं और वहां पर भी अपना च** मारते हैं तो परागकण उस पौधे के वर्तिका घर तक पहुंच जाता है तो इस प्रकार पंछी परागण की क्रिया हुई संपन्न हो जाती है


6. घोघा परागण(Ghogha pollination);



जब pragan घो घो द्वारा संपन्न होता है या घोघा हो द्वारा संपन्न होता है तो उसे घोघा परागण कहते हैं जैसे: सर्व पादप जिमीकंद आज पौधों में घोघा द्वारा  संपन्न होता है


7. चमगादड़ परागण(Bat pollination)

कुछ paudhon me pragan  की क्रिया चमगादड़ द्वारा संपन्न होती है जिसे चमगादड़ परागण कहा जाता है जैसे: कदम ,कचनार ,उप दवा, आदि
चमगादड़ परागण कदम के वृक्ष पर लटका रहता है या अंधेरा रहता है और वह उस पर पुष्प के परागकण उसके शरीर पर चिपक जाते हैं तथा जब वह दूसरे पौधे पर जाता है तो उस पौधे के pushap उसके शरीर से परागकण निकल कर गिर  जिससे  चमगादड़ द्वारा परागण की क्रिया संपन्न  हो जाता है

8. जल परागण(Water pollination);



जल से होने वाले क्रिया या जल से संपन्न होने वाले परागण को जल परागण कहते हैं यह रायगढ़ परागण मुख्य ता जलीय पौधों में होता है जो पौधे जल में पाए जाते हैं एक पुष्पक के परागण जल के  madhyam से दूसरे पुस्तके वर्तिका घर तक पहुंचते हैं तो इस क्रिया को जल परागण कहते हैं



1. जल परागण होने के लिए परागण जल रोधी होते हैं
2. इसमें रंग की कोई भी आवश्यकता नहीं होती है
3. इसमें सुगंध की भी आवश्यकता नहीं होती है
4. इस प्रकार के परागकण अधिक टिकाऊ होते हैं जल्दी खराब नहीं होते हैं

हाइपो हाइड्रो ग्रैंड((Hypo hydro grand);

जब जल का परागण जल के भीतर होता है तो इसे हाइपो हाइड्रा गैरेंस कहते हैं
हो सकता है कि आपके बोर्ड परीक्षा में यही पूछ लिया जाए हाइपो हाइड्रो परागण क्या है तो आप घबराएं बिल्कुल भी ना आप जल परागण को ही लिख सकते हैं या मैंने बहुत ही अच्छी और सरल भाषा में आपको परिभाषा भी दिया है आपको जल्दी याद भी हो जाएगा

A.p hidrogrens :



जब जल परागण पानी की सतह पर होता है या जब जल परागण पानी की सतह पर संपन्न होता है तो उसे a.p हाइड्रो ग्रेंस कहते हैं
जैसे: हाइड्रिला
जल परागित पुष्पों की विशेषताएं:
1. जल परागित पुष्पों रंगहीन गंद हीन मकरंद हीन वह छोटे होते हैं
2. जल परा गीत पुष्प इतने हल्के होते हैं कि जो पानी की सतह पर कर सकते हैं
3. इसके अतिरिक्त उनके चारों ओर मोम जैसा पदार्थ एक परत लगा होता है जो इन्हें सड़ने से बचाता है

कृत्रिम परागण(Artificial pollination);

 जब मनुष्य द्वारा कृत्रिम ढंग से किसी पुष्प के परागकण को स्वेच्छा अनुसार किसी दूसरे पौधे के साथ उसके वर्तिका घर तक पहुंचाता है विभिन्न जाति के पौधे के बीच में संपन्न किया जा सकता है तो इस क्रिया को हम कृत्रिम परागण  कहते हैं हैं


परागण के लाभ एवं हानि(Benefits and disadvantages of pollination);





लाभ(Benefits);

पर परा गीत पुष्पों से बनने वाले फल बड़े भारी स्वादिष्ट होते हैं इसमें बीजों की संख्या अधिक होती है पर परागण से उत्पन्न बीज बड़े भारी स्वस्थ एवं अच्छे नस्ल वाले होते हैं इस बीजों में प्रतिकूल परिस्थितियों की लड़ने की क्षमता रखती है पर परागण के द्वारा रोग रोधक जातियां तैयार की जा सकती हैं

हानि(The loss);

 पर परागण की क्रिया में समय अधिक खर्च होता है इसमें माध्यम की आवश्यकता होती है इसमें पुष्पों को दूसरे पोस्ट पर निर्भर रहना पड़ता है इसमें कीटों को आकर्षित करने के लिए पशुओं को रंग दल चटकीले सुगंध मकरंद आदि उत्पन्न करना पड़ता है इसमें काफी मात्रा में पराग कण व्यर्थ चले जाते हैं इसमें बीज हमेशा संकर बीज उत्पन्न होते हैं
आपको अच्छे से समझ में आया हो तो और भी आर्टिकल आप पढ़ सकते हैं जिससे आपका सिलेबस बहुत ही अच्छी तरह से आगे बढ़ जाएगा तथा दिनों बाद में जाकर के अपना सिलेबस मीनू में सो सकते हैं तो चलिए अब हम सब्जेक्ट करना चाहते हैं तो नीचे कर लीजिए वहां पर आपको अपने आपको आपके पास

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