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स्वपरागण और पर परागण के बीच अंतर (swaparagan aur parparagan me antar in hindi)

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स्वपरागण और पर परागण के बीच अंतर आज हमारा टॉपिक है स्वपरागण और पर परागण इन्हीं चीजों के बारे में बात करेंगे और आप इस पोस्ट में सीखने वाले हैं स्वपरागण और पर परागण क्या है इनका आपको परिभाषा अच्छे से बताया जाएगा इस पोस्ट में इसके साथ साथ में परागण और निषेचन में अंतर क्या होता है पर परागण की परिभाषा और स्व परागण की परिभाषा आपको इस पोस्ट पढ़ने के बाद में कहीं और पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी तो आप इस फोटो को जरूर पढ़ें और ध्यान से पढ़े ताकि आपको अच्छे से समझ में आ जाए अगर आप एक स्टूडेंट है तो यह एग्जाम में भी काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है स्वपरागण और पर परागण अगर आपको आता है तो आप कम से कम पांच नंबर तक कवर कर सकते हैं यह काफी ज्यादा जरूरी है तो आप इसे जरूर पढ़ें

स्वपरागण और पर परागण के बीच अंतर (Difference between self-pollination and pollination in hindi)

जब किसी पौधे के पुष्प से परागकण निकलकर उसी पुष्प के वर्तिकाग्र  तक पहुंचता है तो उसे स्वपरागण कहा जाता है लेकिन जब किसी पौधे के पुष्प से परागकण  निकलकर अपने ही पौधे के दूसरे पुष्प या किसी दूसरे पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र  तक पहुंचता है तो उसे पर परागण कहते हैं

स्वपरागण जैसा कि आप लोग देख रहे हैं इसका नाम से ही लगता है मतलब जो अपने आप में ही परागण की क्रिया संपन्न कर लेता है उसे स्वपरागण कहते हैं मतलब जब किसी पुष्पों में अपने आप में परागण की क्रिया संपन्न होती है तो उसे स्वपरागण कहते हैं लेकिन पर परागण यहीं पर पर पर का मतलब होता है दूसरा तो इसका मतलब यह हुआ कि जब दूसरे के सहारे किसी दूसरे पुष्प के माध्यम से परागण की क्रिया संपन्न होती है तो उसे पर परागण कहते हैं मैं आशा करता हूं कि आप लोगों को समझ में आ गया होगा

स्वपरागण (Self pollination in hindi)

  1. स्व परागण की क्रिया एक ही पुष्प या उसी पौधे के दो पुष्पों के बीच में संपन्न होती है
  2. स्व परागण की क्रिया संपन्न होने के लिए किसी बाहरी साधनों की आवश्यकता नहीं होती है
  3. स्वपरागण के लिए एक पुष्प के पुमंग तथा जायंग एक साथ  परिपक्व होते हैं
  4. स्वपरागण की क्रिया संपन्न होने के लिए पुष्पों में ज्यादा आकर्षण जरूरी नहीं होता है तथा स्वपरागण वाले पुष्पों में मकरंद नहीं होता है
  5. स्वपरागण की क्रिया संपन्न होने के लिए किसी दूसरे पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है
  6. स्व परागण की क्रिया संपन्न होने के लिए परागकण कम खराब होते हैं या फिर खराब ही नहीं होते हैं
  7. स्वपरागण से बने बीजों से उत्पन्न पौधे दुर्बल होते हैं
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पर परागण (Pollination hindi)

  1. पर परागण की क्रिया दो अलग-अलग पौधों के फूलों के बीच में संपन्न होती है
  2. पर परागण की क्रिया संपन्न होने के लिए बाहरी साधनों की आवश्यकता होती है जैसे वायु
  3. पर परागण की क्रिया संपन्न होने के लिए पुष्पों का आकर्षक होना बहुत जरूरी है जिससे पंछी कीटाणु तथा अन्य जीव उस पर आकर्षित हो सके
  4. पर परागण की क्रिया संपन्न होने के लिए पौधों में मकरंद सुगंध इत्यादि का होना काफी जरूरी होता है
  5. पर परागण की क्रिया संपन्न होने में परागकण काफी ज्यादा खराब जाते हैं
  6. पर परागण की क्रिया में एक ही पुष्प के पुमंग व जायंग अलग-अलग समय पर परिपक्व होते हैं ताकि स्वपरागण ना हो सके
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परागण की परिभाषा (Definition of pollination in hindi)

स्वपरागण और पर परागण के बीच अंतर (swaparagan aur parparagan me antar in hindi)
स्वपरागण और पर परागण के बीच अंतर (swaparagan aur parparagan me antar in hindi)

पुष्प के पराग कोष से पराग कणों का निकल कर किसी दूसरे पुष्प के या उसी पुष्प के  वर्तिकाग्र  तक पहुंचने की क्रिया को परागण कहते हैं परागण दो प्रकार से होता है स्वपरागण और पर परागण।

परागण कितने प्रकार के होते हैं (What are the types of pollination hindi)

परागण दो प्रकार के होते हैं (There are two types of pollination in hindi)

  1. स्वपरागण की परिभाषा
  2. पर परागण की परिभाषा

स्वपरागण की परिभाषा (Definition of self pollination in hindi)

जब एक पुष्प के परागकण उसी उसी पुष्प के या उसी पौधे के अन्य पुष्प के वर्तिकाग्र  पर पहुंचते हैं तो उन्हें स्वपरागण कहा जाता है 

स्वपरागण के कुछ उदाहरण (Some examples of self pollination in hindi)

सदाबहार, पैंजी, गुल मेहंदी, मूंगफली, खट्टी बूटी, इन सभी में स्व परागण की क्रिया संपन्न होती है

स्वपरागण से होने वाले लाभ (Benefits from self pollination in hindi)

परागण की क्रिया में स्वपरागण और पर परागण होता है जिनमें से सभी का अपना अपना हानि और लाभ होता है तो चलिए हम स्वपरागण के लाभ के बारे में पता करते हैं

  1. स्वपरागण के लिए किसी वाह माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है यह इसके लिए काफी ज्यादा लाभदायक होता है 
  2. कीट पतंगों को आकर्षित करने के लिए विशेष उपकरणों जैसे रंग गंध है या मकरंद उत्पन्न करने की आवश्यकता नहीं होती है 
  3. स्वपरागण द्वारा पैतृक गुणों को बनाए रखा जाता है
  4. तथा स्वपरागण में परागकण खराब नहीं जाते हैं

स्वपरागण से होने वाली हानि (Loss from self pollination in hindi)

  1. स्वपरागण से बने बीज से उत्पन्न पौधे दुर्बल होते हैं
  2. पौधों में विभिन्न बताए नहीं होती हैं और पौधे में नए लक्षणों का विकास नहीं हो पाता है जब स्वपरागण होता है तो

पर परागण के परिभाषा (Definition of cross pollination in hindi)

जब एक पुष्प के परागकण उसी जाति के किसी दूसरे पौधे पर लगे पुष्प के वर्तिका घर पर पहुंचते हैं तो उन्हें पर परागण कहा जाता है  पर परागण के लिए पराग कणों को अन्य पुष्पों पर पहुंचाने के लिए किसी ना किसी साधन की आवश्यकता होती है जैसे कि वायु जल पंछी अथवा जंतु के माध्यम से परागकण किसी अन्य पौधे के पुष्प पर पहुंचते हैं

पर परागण के उदाहरण

सूरजमुखी गेंदा साल्विया  आदि पुष्पों में पर परागण की क्रिया संपन्न होती है

पर परागण के साधन

जैसा कि हमने पर परागण में बात किया था कि साधन की आवश्यकता होती है तो उन में कौन-कौन से साधन की आवश्यकता होती है हम इन्हीं सभी चीजों के बारे में बात करेंगे उनमें से पर परागण की क्रिया कीटों द्वारा वायु द्वारा जल द्वारा तथा जंतुओं द्वारा संपन्न होता है तो हम इस पैराग्राफ में ही जानेंगे कि वायु परागण कैसे होता है कीट परागण कैसे होता है तथा जल परागण कैसे होता है इन सभी चीजों के बारे में जानने के बाद हम इसके बारे में हानि और लाभ भी जानेंगे

कीट परागण किसे कहते हैं परिभाषा (Definition of what is insect pollination in hindi)

जब पर परागण की क्रिया कीटों के द्वारा संपन्न होता है तो उसे कीट परागण कहते हैं

कीट परागण होने के लिए पुष्पों  में कौन-कौन से गुण होने चाहिए (What qualities must flowers have for insect pollination? in hindi)

  1. कीट परागण के लिए पुष्प का आकर्षण होना काफी ज्यादा जरूरी है
  2.  पुष्प के दल प्रायः बड़े रंग-बिरंगे आकर्षक तथा भड़कीले होने चाहिए रंग-बिरंगे पुष्पों में कीट परागण होता है कभी-कभी दलपुंज के अतिरिक्त पुष्प के अन्य भाग रंगीन होकर भड़कीले और आकर्षक हो जाते हैं 
  3. रात्रि में खेलने वाले पुष्पों में सुगंध कीटों को आकर्षित करती है जैसे हार सिंगार चमेली रात की रानी आदि
  4. कीटो से परागण के लिए पुष्पों में मकरंद ग्रंथियां पाई जाती हैं किट मकरंद की खोज में अनायास ही परागण कर जाते हैं
  5. कुछ पुष्पों के परागकण कीटों का भोजन होते हैं अतः भोजन की तलाश में कीड़ों द्वारा परागकण क्रिया हो जाती है
  6. कीट परागण वाले पुष्पों मेंवर्तिकाग्र चिपचिपा होता है जिससे परागकण  आसानी से इससे चिपक जाते हैं

वायु परागण किसे कहते हैं ( What is air pollination in hindi)

जब पर परागण की क्रिया वायु के द्वारा संपन्न होती है तो उसे वायु परागण कहते हैं वायु परागण के लिए परागकण का काफी ज्यादा हल्का होना जरूरी है ताकि वायु के साथ में परागकण  उड़ते उड़ते किसी अन्य पुष्प के वर्तिकाग्र  तक पहुंच सके

  1. वायु परागण की क्रिया संपन्न होने के लिए पुष्प प्राया छोटे तथा समूह में लगे रहते हैं तथा जो परागकण वायु के द्वारा होता है उसमें पुष्प रंग सुगंध तथा मकरंद नहीं पाए जाते हैं या होना कोई जरूरी नहीं है वह दल तथा दल प्राया छोटे या अनुपस्थित होते हैं जिससे परागकण सुगमता से  पहुँच जाते है 
  2. पुंकेशरो के के पुंतंतु लम्बे होते है 
  3. परागकण अत्यधिक मात्रा में बनते हैं क्योंकि वायु के माध्यम में इनकी हानि बहुत अधिक होती है परागकण हल्के शुष्क एवं जल रोधी होते हैं कुछ पौधों में परागण पंख युक्त होते हैं ताकि यह वायु में आसानी से उड़ सके उदाहरण के लिए गेहूं जो मक्का बाजरा घास में वायु परागण का क्रिया संपन्न होता है

जल परागण किसे कहते हैं (What is water pollination called in hindi)

जब परागण की क्रिया जल के द्वारा संपन्न होता है तो उसे जल परागण कहते हैं
दूसरे शब्दों में जलीय पौधों में जल परागण होता है उन पौधों के पुष्प जल के अंदर जिस तल  पर रहते हैं परागकण अपने घनत्व के कारण उचित तल पर करते रहते हैं और मादा जनन अंगों के संपर्क में आने पर परागण कर देते हैं तो यह जल परागण कहलाता है कुछ जलीय पौधों में नर पुष्प पृथक होकर जल की सतह पर तैरते रहते हैं मादा पुष्पों के व्रत के कुंडलिक हो जाने से मादा पुष्प जल की सतह पर आ जाते हैं नर पुष्प जब मादा पुष्प के संपर्क में आते हैं तो परागण हो जाता है उदाहरण के लिए हाइड्रिला, सेरेटोफिल्म 

जंतु परागण किसे कहते हैं (What is animal pollination called in hindi)

जब परागण  की क्रिया जंतुओं के द्वारा संपन्न होती है तो उसे जनता परागण कहते हैं  जनता परागण के उदाहरण चमगादड़ के द्वारा संपन्न होने वाला पक्षियों के द्वारा जलियावास के समीपवर्ती क्षेत्रों के पौधों में घोघो द्वारा परागण होता है परागण कदम्ब सेमल बनहिनिया आदि पौधों में होता है

पर परागण के लाभ

  1. पर परागण से बीजों की नई नई  अधिक उन्नत जातियां उत्पन्न होती हैं\
  2. पर परागण के फल स्वरुप बने बीज स्वस्थ होते हैं
  3.  कृतिम पर परागण से रोग अवरोध क्षमता युक्त जातियां तैयार की जाती हैं
  4.  पौधों में नए लक्षणों का समावेश होता है पर परागण की क्रिया से अगर परागण होता है तो

पर परागण से होने वाली हानि

  1. पर परागण के लिए पुष्पों को वह संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ता है 
  2. अधिक मात्रा में परागकण  उत्पन्न करने पड़ते हैं 
  3. रंग गंधवा मकरंद उत्पन्न करने में काफी भोजन सामग्री पे करनी पड़ती है 
  4. जाति  की शुद्धता नहीं रह पाती है

परागण और निषेचन में अंतर (Difference between pollination and fertilization in hindi)

  1. परागकोषो  में बने परागकण उसी जाति केवर्तिकाग्र पर पहुंचते हैं लेकिन निषेचन में नर तथा मादा युग्मकओ का सयुग्मन  होता है
  2. पर परागण के लिए अनेक प्रकार के माध्यमों की आवश्यकता होते हैं जैसे वायु जलवा कीट पतंगे आदि लेकिन निषेचन में यह क्रिया पराग नलिका के अंडाशय तथा अंत में बीजांड के अंदर प्रवेश करने के बाद होती है अतः किसी साधन की आवश्यकता नहीं होती है
  3.  पर परागण की क्रिया परागण पहले होनी आवश्यक है लेकिन निषेचन यह क्रिया परागण के बिना नहीं हो सकती है

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